



















पूज्य आचार्यश्री रूपचन्द्र जी महाराज के पावन सान्निध्य, साध्वी कनकलता जी महाराज की पुण्य उपस्थिति और संस्कृति संज्ञान के संयोजन में आश्रम परिसर में “रामचरित मानस : मनुष्य होने की कला और लोकमङ्गल का दर्शन” विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में 50 से अधिक विद्वत विभूतियों, प्राध्यापक, अध्यापक लेखक, कलाकार, विधिवेत्ता, शोधार्धी और समाजसेवियों ने भाग लिया।
इसके तहत प्रमुख रूप से ऋषिकेश के पूज्यपाद स्वामी ओमानंद सरस्वती, पीजीडीएवी कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. हरीश अरोड़ा जी, प्रतिष्ठित कला मर्मज्ञ श्री अरविंद ओझा जी, विचारक और लेखक पुरुषोत्तम प्रतीक जी, कवि व शायर श्री मनोज श्रीवास्तव जी, डॉ. मनीष तिवारी जी, एडवोकेट संदीप जिंदल जी, श्री रामजी तिवारी जी, श्री रविशंकर जी, शिक्षक श्री प्रदीप तिवारी जी सहित अनेक सुधी जन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संयोजन संस्कृति संज्ञान के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप सिंघल जी ने किया। अतिथियों का स्वागत मानव मंदिर मिशन के संगठन मंत्री श्री सुभाष तिवारी जी ने किया, और कार्यक्रम की अध्यक्षता मिशन के महामंत्री डॉ. अरुण प्रकाश जी ने की।
आश्रम की ओर से कार्यक्रम की व्यवस्था श्री आशुतोष दुबे (वेदांत), और श्री शिवांग शुक्ल ने संभाली।

